क्या नवजात शिशु अपनी माँ को सूंघ कर पहचान सकता है।

kya navajaat shishu apanee maan ko soongh kar pahachaan sakata hai:-


नवजात शिशुओं ने अपने जीवन की शुरुआत माँ के साथ की। माँ के साथ रहते रहते नवजात शिशु माँ को सुंघ कर ही पहचानने लगता है। 

कैसे नवजात शिशु माँ की खुशबू की पहचान जाते है।:-



खुशबू अक्सर यादों को जीवन में वापस ले जाती है। विशेषज्ञ कहते हैं "जब आप ओवन में चॉकलेट चिप या कुकीज ओवन में पकाएं, और उस सुगंध से आप दादी की रसोई की अचानक यादों को हो जाते है। वैसे ही एक नवजात शिशु को माँ की खुशबू शिशु को माँ के आस-पास होने या माँ को पहचानने मे मदद करती है।


kya navajaat shishu apanee maan ko soongh kar pahachaan sakata hai.
"इस तरह के मजबूत खुशबू आम हैं।" हालांकि, एक नवजात शिशु के लिए अपनी माँ के निप्पल को पता लगाने की कोशिश करना भी शिशु को अपनी माँ को पहचान करने मे मदद करता है, जो कि शिशु को  माँ के गंध और अनुभव के बीच का संबंध एक शक्तिशाली बल बन जाता है, जो शिशु और माँ के बीच एक मजबूत बंधन का आधार बनता है।


  • यूसीएसडी की परीक्षण में एक चूहे के बच्चे को  अपनी माता के आसपास भोजन और देखभाल के लिए रखा था। हर बार, उनकी छोटी नथुने उनकी माताओं की गंध को पहचानने के कारण, गंध स्पष्ट रूप से इतना परिचित हो गया कि चूहों के मस्तिष्क की कोशिकाओं ने इसे जल्दी से पहचानना शुरू कर दिया। 


कैसे नवजात शिशु माँ की खुशबू की पहचान जाते है


  • संक्षेप में,  अगर कोई एक खुशबू बार-बार सामने आने लगते है तो शिशु के दिमाग में माँ की खुशबू मजबूत हो जाती है।
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि नवजात शिशु के जीवन में शुरुआती समय में एक महत्वपूर्ण समय सीमा हो सकती है, जब तंत्रिका तंत्र का विकास होता है।


  • दूसरे शब्दों में, नवजात शिशु शायद अपने मन में अपनी माँ की खुशबू को उकेरती (enagreving) है, जिससे वह अपने जीवन की सबसे शुरुआती खोजों में से एक बन जाती है।


  • हर प्राणी में अपनी एक विशेष गंध होती है। जिससे हर प्राणी की पहचान कर सकते है। परंतु हर कोई नही समझ पता कि किस प्राणी की कौन सी खुशबू होती है। अगर आपको बोला जाए कि आपकी या आपके परिवार मे किसी सदस्य की खुशबू को पहचाने तो आप को समझ नही आयेगा कि क्या करना है मगर नवजात शिशु जन्म के बाद साफ से देख नही पता है जिसके लिए उनमे एक अलग सा कौशल होता है कि नवजात शिशु अपनी माँ को सुंघ कर पहचान जाता है। माँ तो अपने नवजात शिशु हो या युवावस्था बच्चे को पहचान जाती है, परन्तु एक नवजात शिशु जो नासमझ होता है जिसे ठीक से कुच साफ दिखाई नही देता है। 

तो शिशु अपनी माँ कैसे पहचानता है?


नवजात शिशु को खास कर माँ को पहचानने की अपनी शक्ति होती है क्योकि नवजात शिशु 9 महिने अपनी माँ के गर्भ मे था। फिर जब शिशु का जन्म हुआ तब भी सबसे पहले अपनी माँ की गोद मे माँ का स्पर्श होती हैं जो शिशु को अपनी माँ की खुशबू को दिल और दिमाग मे छप जाता है जो कि नवजात शिशु को साफ से ना देखने के बावजूद शिशु अपनी माँ को अच्छे से पहचान जाता है।

शिशु, माँ को उसकी खुशबू, गंध, स्पर्श, और माँ की अवाज से नवजात शिशु अपनी माँ को पहचान जाती है। 

अगर आपके पास भी एक नवजात शिशु है तो आपने ध्यान दिया होगा कि शिशु अपनी माँ की गोद मे शांत और खुश रहता है लेकिन जैसे ही कोई अनजान या परिवार के अन्य सदस्य के पास रोने लगता है। या आपकी गोद से वो दुसरे किसी अनजान व्यक्ति की गोद मे जाना नही चाहता है अगर किसी अनजान व्यक्ति ने अगर गोद लिया हो तो शिशु तुरंत रो रो कर अपनी माँ को बुलाने लगता है।



यह बात सभी तरह के जीव-जंतु पर लागू होती है।


पशु- पक्षी, कोई भी अन्य जीव अपने बच्चे को कहीं दुर या भीड़ मे भी अपने बच्चों को पहचान लेते हैं। पशु- पक्षी,जीव-जंतु सभी  ध्वनि, गंध या  कोई भी  शारीरिक रचना से अपने शिशु को या शिशु अपनी माँ को पहचान जाते है।

गायों के झुंड में बछड़ों की भीड़ के बीच बछड़े अपनी माँ को या गाय अपनी बछड़े पहचान जाते है। बिल्ली,कुत्ता,भालू,शेर,हाथी,घोड़ा,बकरी, चीता,बाघ और भी सभी प्राणी अपने बच्चों को सूंघकर पहचानते है और इनके बच्चे भी इसी तरह से पहचान लेती है। बहुत से जीव-जंतू जन्म के बाद अपने बच्चों सूंघते हैं और अपने बच्चों की सुगंध को याद रखते है। जिससे जीव-जंतू अपने बच्चों को पहचान जाते है। कुछ जीव अपने बच्चे को जीभ से चाटते है । कितना आश्चर्य होता है कि प्राणि अपने बच्चे को सुंघ कर पहचानना। 

हालांकि मनुष्य समझदार और विकसित मस्तिष्क का प्राणी होता है इसलिए समय के साथ पहचान करने के तरीके बदल जाते है।

JAI RAM SHARMA

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